Badaun News: जिला महिला अस्पताल में रोटी पर पहरा, सीएमएस के फरमान से तीमारदार बेहाल

 

Badaun News । जिला महिला अस्पताल में स्वच्छता के नाम पर लागू किए गए नए फरमान ने तीमारदारों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका सीएमएस द्वारा अस्पताल परिसर में बाहरी भोजन लाने पर लगाए गए सख्त प्रतिबंध ने गरीब और ग्रामीण क्षेत्र से आए लोगों को भुखमरी की कगार पर पहुंचा दिया है। सुरक्षा गार्डों द्वारा टिफिन अंदर ले जाने से रोके जाने के कारण तीमारदार खुले आसमान के नीचे सड़क पर बैठकर भोजन करने को मजबूर हैं। अस्पताल प्रशासन इसे शासन का निर्देश बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है, जबकि तीमारदारों के लिए गंभीर मरीजों को अकेला छोड़कर बाहर जाना सुरक्षा और ममता दोनों के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बन गया है।

स्वच्छता के नाम पर कड़ाई, मानवीय संवेदनाएं ताक पर

अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि वार्डों में गंदगी रोकने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था। जिला महिला अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्डों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी तीमारदार भोजन का डिब्बा लेकर परिसर में प्रवेश न करे। इस 'रोटी कानून' के कारण उन ग्रामीणों की कमर टूट गई है जो दूर-दराज के इलाकों से अपने मरीजों के लिए घर का सादा खाना लेकर आते हैं। उनके पास हर वक्त होटल या ढाबे पर पैसे खर्च करने की सामर्थ्य नहीं है।

ऑपरेशन के बाद मरीज को अकेला छोड़कर कैसे जाएं?

हैरानी की बात यह है कि अस्पताल की आधिकारिक गाइडलाइन केवल वार्ड के भीतर खाना खाने और गंदगी फैलाने पर रोक लगाती है, लेकिन जमीनी हकीकत में पूरे परिसर को ही नो-फूड ज़ोन बना दिया गया है। तीमारदारों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल के लॉन या छायादार जगहों पर भी बैठने नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में बुजुर्गों और महिलाओं के लिए चिलचिलाती धूप या खुले में सड़क किनारे बैठकर खाना एक सजा जैसा हो गया है। साथ ही, प्रसव या ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीजों को वार्ड में अकेला छोड़कर बाहर भोजन करने जाना किसी जोखिम से कम नहीं है। अस्पताल की इस व्यवस्था ने शासन की मंशा और स्थानीय प्रबंधन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

"हम केवल शासन के आदेशों का पालन कर रहे हैं। मरीजों को भोजन अस्पताल देता है। तीमारदारों की सुविधा के लिए रैन बसेरा में खाने की व्यवस्था की गई है।"

— डॉ. शोभा अग्रवाल, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल

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